नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह नौ दिनों का उत्सव मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित होता है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व होता है, जिन्हें देवी दुर्गा का पांचवां स्वरूप माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत शांत, तेजस्वी और दिव्य होता है। इन्हें देवी पार्वती और गौरी के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन भक्त पूरे विधि-विधान से मां की पूजा-अर्चना करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।
मान्यता है कि मां स्कंदमाता की उपासना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। साथ ही संतान से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। उनकी कृपा से भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, पूजा के बाद मां की आरती करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। बिना आरती के पूजा को अधूरा माना जाता है, इसलिए श्रद्धालु पूरे भक्ति भाव से मां स्कंदमाता की आरती गाते हैं।
भक्त पूजा के पश्चात पारंपरिक आरती “जय तेरी हो स्कंद माता…” का पाठ करते हैं और मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसके साथ ही स्कंदमाता के मंत्रों का जाप भी विशेष फलदायी माना जाता है।